Sunday, 23 August 2015



जहां लिखा हो सत्यमेव जयते ,
उसके साथ जरूर लिखें श्रमेव जयते ।
दुनिया मे विकास की क्रान्ति का,
सूत्र धार मजदूर ,,
सुख-सुविधाओं से आज भी ,
वो है कोसो दूर 
ये कैसी विडम्बना है देखो श्रमिक
करता बडी-बडी गाडियों का निर्माण ,
लेकिन बैठ नही सकता उनमें
इसके हैं लाखों प्रमाण  ।
मजदूर की दुर्दशा देखो सडको-साइटों पर
झुग्गी –पाइपों में है उनका बसेरा ,
लेकिन हमारे लिये भवन-सडक बनाकर
लाता है जीवन मे खुशियों का सवेरा ।
          क्या राजधानी क्या शताब्दि
                       या हो हवाई जहाज ,
           अपनी मेहनत के बल पर
                     बैठ नही सकता उनमें वह आज ।
मिस्त्री, मोची ,नाई, दर्जी और धोबी
बनाते हैं सूट टाई वालो को महान ,
क्या मानवता के लिये
हम सब भी दें मजदूरो को सम्मान ।                

लोकेश चौहान

Wednesday, 19 November 2014

Himalaya Tsunami (Uttarakhand Trasadi)


                                        हिमालय सुनामी
उत्तराखन्ड में कोहराम मचा था
         चारों ओर थी त्राहि-त्राहि
मिलकर सभी ऐसी विपदा में
          साथ-साथ लडे ये लडाई ।

                            नर-नारी का भेद नही था
                                  संकट में भी जवानो ने जान बचाइ ,
                            सेना हो या वायु सेना 
                                    सभी वीर सिपाहियों को हार्दिक बधाई ।

केदारनाथ धाम में
     यह विभिषिका  बहुत बडी थी ,
संकट मानव जीवन पर था
           हर ओर मौत खडी थी ।

                             दर्दनाक उस मंजर को
                                 याद करते ही रुह कांपने लगती है
                             जल नही जलधि बन गयी थी घाटी
                                    आज भी वो स्वप्न में दिखती है ।

hamari soch


हमारी सोच
आज हर आदमी है
आदमी से परेशान,
इन्सानियत जा रही बिख्ररती
हम बन रहे सैतान ।
अपने ही अपनो को
दे रहे धोखा,
अब बचा नही है धरती पर
प्रदुषण से, कोई हवा का झोखा ।
                  गंगा, यमुना तडफ़ रही हैं
अपनी लाज को बचाने,
हर गली-हर नुक्कड पर
हैं लाखों शराबखाने ।
बारुद के ढेर पर
हम आज हैं बैठे ,
कैसे दुसरे को नीचा दिखायें
इसी नशे में ही ऐठें ।

जब  हो जायेंगे बरबाद,
उजड जायेगा ये चमन
क्या फिर ,खत्म हो जायेगी दुश्मनी
फ़ैलेगा हर तरफ अमन ?
कभी थी सोने की चिडिया
अपना यह प्यारा देश,
दिल रो रहा है आज देखकर
पश्चिमी व्यवस्था और परिवेश ।
समय रहते बदल लें
कर लें सकारात्मक सोच और मन ,
बदलकर इस व्यवस्था को
फैलायें शान्ति और अमन ।