Wednesday, 19 November 2014

quality circle


गुणवत्ता – चक्र (QUALITY CIRCLE)

उत्पादन प्रक्रिया में, समस्याओं के निवारण के लिये
ऐसा एक सिद्धांत है आया ,
गुणवत्ता-चक्र की व्याख्या के बल पर
जग प्रसिद्ध हुऐ श्री इशिकावा ।

अपने संस्थान में आजकल
क़्वालिटी सर्कल का, चारों ओर है शोर,,
निरन्तर प्रगति पथ पर चलते रहें
इसी प्रकरण पर सबका जोर ।

क़वालिटी सर्कल ,प्रथम स्तर पर
कर्मचारियों से बनी एक टीम है ,
जो गुणवत्ता ,उत्पादकता , सेवा
कार्य को निरन्तर अच्छा बनाने की स्कीम है ।


सदस्यों का विकास, व कार्य प्रणाली में सुधार
है इस प्रक्रिया की महत्वपूर्ण पहचान ,
मानवता के प्रति आदर-भाव बढाने में
है इस गुणवत्ता-चक्र का विशेष योगदान ।

परियोजना (theme) का प्रस्तुतीकरण(presentation)
है इसकी मुख्य पहचान ,
इसको प्रस्तुत करने में सदस्य
लगा देते पूरा अनुभव व ज्ञान ।
                                       
                                      

Gunvatta(Quality) ka mahtv


गुणवत्ता का महत्व

गुणवत्ता विकास की सीढी है,
इससे न करो कभी खिलवाड़
हौसलें आपके बुलन्द हों तो
रास्ते देंगे स्वयं
क्या रेत,क्या समुद्र या हो पहाड़ ।

ग्राहक सन्तुष्टि का करके ध्यान
हर पुर्जे की शून्य-त्रुटि का लेकर मन्त्र महान,
सबसे बडा, “ग्राहक है प्रचारक” हमारा
यही वाक्य है, हमारे लिये विधाता का विधान।

इसी मन्त्र में छिपा भविष्य ,
हमारी सफलता से आगे बढने का,
लेलें शपथ,अब से त्रुटि नही होगी
संकल्प लें,
 विकास की सीढी चढ्ने का।

गुणवत्ता के साथ-साथ
व्यवहार हमारा निर्मल हो
व्यवसाय को कैसे आगे बढाए
यही हम सभी साथियों का लक्ष्य हो।
                                                 लोकेश कुमार
                                                 -S.K.H.1.weld-1

Make in India


MAKE IN INDIA

हमे अपनी SKILL का
नहीं कोई अभिमान
देश हमारा बदल चुका है
जाग उठा है नौजवान

I.T. हो या औटोमोबाईल
सबसे आगे होगा हिन्दुस्तान
यह देखकर आश्चर्यचकित
फ़्रांस, अमेरिका, चीन और जापान

देखनी है हमारी असली
गुणवत्ता की उडान
तो इस जहाँ से कह दो
थोडा और ऊँचा कर दे आसमान

Sunday, 8 September 2013

ulajhte sambandh toot te rishte

उलझते सम्बन्ध- टुटते रिस्ते
बहु-सास के खेल में
मां – बेटी की हो रही जीत ,
इन रिस्तों के प्रकरण में
फंसा हुआ नादान अजित (पति)

मां सपने दिखलाती बेटी को
तुझे ऐसा वर दिलवाउंगी ,
वर भरेगा पानी तेरा
ऐसी घुट्टी  पिलवाऊंगी  ।

संस्कारों की कमी है मुझमें
मै तुम्हें नही दे पाउंगी ,
पापा को गिरवी रखवाकर
तुम्हें स्विफ्ट कार दिलवाउंगी ।

सास –ससुर तेरे रहे पास न
मै ऐसी तरकीब लगाउंगी ,
दुरभाष (मोबाइल) से रोज समझाकर
उन मां बेटे को लड्वाउंगी ।

रिस्ता तेरा ऐसा ढुंडुगी
जहां पति अकेला हो ,
पूरा वेतन हाथ पर रख दे
जाते ही तू महारानी हो ।

   इस कलयुगी मां को क्या हो गया,जो देती बेटी को ऐसी सीख ,
   सोचो लोकेश ,जब यह सास बनेगी ,माँगेगी बहु से रोटी की भीख

लोकेश चौहान ।

Wednesday, 28 September 2011

Dard Rishton Ka


पन्छी जब आता है लौटकर , लम्बी उडान से ,,
डालियां आज भी सिर झुका लेती है सम्मान से ।

       दर्द रिश्तों का
नवरात्र का त्योहार है आया,
अन्तर्मन मे यादों का गुब्बार लाया ।
नवरात्र के लिये हुई जौ बोने की तैयारी ,,
बच्चे-बडे लाते हैं, पत्ते मिट्टी न्यारी-न्यारी।

      वो गायों का सुबह-शाम रम्भाना
      दूध के लिये अपने प्रेमीजनों को बुलाना।
      गायें जाती जंगल चरने, बछ्डे-बछ्डी करते इन्तजार
      शाम को माँ आयेंगी जरुर ऐसा उनको ऐतबार्।

नयी फ़सल के लिये बैलों से किसान जोतते खेत,
अच्छी से अच्छी तैयारी करते एक से बढ्कर एक्।

आज याद आती खेतों में चलते भोला,
हीरा-मोती के गले की घंटी की आवाज,
ऐसा लगता कर्ण-पटल पर जैसे
स्वर्ग में बज रहा है कोई मधुर साज्।

वो हल चलाते हुए किसान का हुं,आ,हट करना,
उसके बैलों का सुनना और उन हा, अ, हट पर डरना्।
किसान जुडा रहता बैलों से,जैसे हो उसकी सन्तान,
 बैल भी समर्पित स्वामी पर, खडे रहते थे उनके कान।

गेंहु की बुआई में सभी जन-बच्चों का खेत में जाना;
याद आते हैं अब वो दिन जब खेत में खाते थे खाना। 
 
ऐसा लगता है उन दिनों में, हम थे रिस्तों से इन्सान
समय बिता दिन बीते हो गया भाई के लिये भाई मेहमान्।

माया ने बनाई यह दूरी, खेल के अपनी चाल’
रिस्ते- नाते बिखर रहे हैं चारों तरफ है माया जाल।
माया के चक्कर में हम, फ़ंस गये ऐसे आज
बेटा बाप से पुछ रहा है कंहा है हिसाब-किताब।

लालची ऐसे बन गये हम, खिंची ऐसी चारों ओर लकीर
पत्नी और बच्चों के चक्कर में, जीवन बना फ़कीर्।
क्या पत्नी-बच्चों के अलावा नही कोई रिस्ता-नाता
चाहते हुऐ भी इन्सान बहन-भाई,माँ-बाप के लिए कुछ नही कर पाता।

जागो मेरे प्यारों जागो, अपनो से
करो न अब कोइ विवाद
प्यार-प्रेम को बढाकर जग में
लो शुभकामना और आशीर्वाद्।
                   लोकेश कुमार चौहान
                          पंजनहेड़ी ।